आप सभी को और आप के भीतर के भगवान को नमस्कार।
जब मैंने एक दिन सामाजिक कार्य करने की कोशिश की तब कई लोगों ने मुझे समझाया इससे क्या फायदा। फिर भी मैंने 100 बच्चों का नाम लिखे एवं उनकी आयु लिखी और उन सब के लिए स्वेटर खरीद कर लाई और अपने पिताजी ,पत्नी एवं कुछ गणमान्य लोगों के द्वारा उसे वितरित करवाए। मुझे ऐसा लगा कि मैंने यह करके पैसे खर्च कर दिए।
कुछ दिनों बाद जब मैंने वहां स्वेटर बच्चों को पहने देखा और ठंड से बचते हुए देखा तो ऐसा लगा यह मैंने बहुत अच्छा काम किया तब मुझ में यह फीलिंग जागृत हुई अब ऐसे काम में करते रहूंगा।
और जो खुशी प्राप्त हुई थी वह मैं बयान नहीं कर सकता
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