Friday, October 4, 2019

सबका अपना देखने का नजरिया है
किन्तु प्राचीन वैदिक पद्धति को दोष देने से पहले कुछ और तथ्यों को समझना होगा

एकलव्य कोई असहाय नही था वह निषादराज पुत्र था मतलब वह सामान्य बालक नही था द्रोणाचार्य कौरवो और पांडवों के कुलगुरु थे जो कौरव और पांडव राजकुमारों को ही पढ़ते थे

शायद अपने ध्यान नही दिया द्रोण ने बहुत से ऐसी शिक्षये अर्जुन को दी जो अपने पुत्र अश्वस्थामा को भी नही दिया था

आखरी बात एकलव्य के धनुर्विद्य       को देखकर द्रोण इतने प्राभावित हुए की उसे आधुनिक धनुरबिद्या का जन्मदाता बना दिया

एकलव्य के अति मेधावी होने का पता जब द्रोण को चला तो उन्होंने एकलव्य का अंगूठा ले लिया उसके बाद द्रोण उसके गुरुभक्ति से इतने प्रसन्न हुए की उन्होंने एकलव्य को मध्यमा और तर्जनी अंगुली से धनुष चलना सिखाया जो आज के आधुनिक धनुर्विद्या का मापदंड है

Tuesday, October 1, 2019

आप सभी को और आप के भीतर के भगवान को नमस्कार। 
 जब मैंने एक दिन सामाजिक कार्य करने की कोशिश की तब कई लोगों ने मुझे समझाया इससे क्या फायदा। फिर भी मैंने 100 बच्चों का नाम लिखे एवं उनकी आयु लिखी और उन सब के लिए स्वेटर खरीद कर लाई और अपने पिताजी ,पत्नी एवं कुछ गणमान्य लोगों के द्वारा उसे वितरित करवाए। मुझे ऐसा लगा कि मैंने यह करके पैसे खर्च कर दिए।
 कुछ दिनों बाद जब मैंने वहां स्वेटर बच्चों को पहने देखा और ठंड से बचते हुए देखा तो ऐसा लगा यह मैंने बहुत अच्छा काम किया तब मुझ में यह फीलिंग जागृत हुई अब ऐसे काम में करते रहूंगा।
और जो खुशी प्राप्त हुई थी वह मैं बयान नहीं कर सकता
आज मैं सुबह कालेज पहुँचा और कक्षा मै पडाना शुरू कीया पर बच्चे पडने के मुड मै नही थे। मिड सेमेस्टर पुरे होने के कारण बच्चे भी कम आये।
फीर मैंने उनसे मन की बात की। और मुझे बहुत कुछ सीखने के लिए मीला।

Gandhi jayanti

Today our college given Holiday in the behalf of Gandhi jayanti. Today I am very happy that I do lots of work which is pending. 
But due to Holiday everyone walk up late in morning. Now start to lots of work.